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  • एसआई खुदकुशी केस (दिल्ली)

    एसआई खुदकुशी केस (दिल्ली)

    17 जनवरी 2016 दिल्ली पुलिस के 2008 बैच के एसआई बिजेंद्र (35) ने रविवार सुबह 11:40 बजे द्वारका सेक्टर 4 के डीडीए पार्क में अपनी गर्लफ्रेंड निक्की चौहान (25) को बुलाकर अपनी सर्विस रिवॉल्वर से गोलियां मार कर उसका मर्डर कर दिया था। निक्की की मौके पर ही मौत हो गई जबकि बिजेंद्र की मौत एम्स ट्रॉमा सेंटर में रविवार दोपहर बाद 4:30 बजे हो गई थी। बिजेंद्र बिश्नोई वेस्ट दिल्ली के रनहोला थाने में सब इंस्पेक्टर थे।

    बिजेंद्र की पैंट से डॉक्टर को पर्स में एक स्यूसाइड नोट रखा हुआ मिला था। बिजेंद्र ने इस नोट में निक्की की वजह से मिल रही यातना के बारे में लिखा है। उसके मुताबिक, निक्की से उसके संबंध 2010 में बने थे और उसके बाद वह परेशान रहने लगा था। स्यूसाइड नोट में बिजेंद्र ने निक्की पर एक्सटॉर्शन का इल्जाम लगाया है। उसके मुताबिक, निक्की ने उसके खिलाफ कंप्लेंट देकर उससे पांच लाख रुपये वसूले थे। यह रकम लेकर उसने कंप्लेंट वापस ले ली थी, लेकिन कुछ दिनों बाद उसने और रकम की डिमांड करना शुरू कर दिया था। अब वह 10 लाख रुपये की डिमांड कर रही थी। इस रकम के लिए निक्की उसे लगातार परेशान करती रही।

    एसआई ने स्यूसाइड नोट में लिखा है कि इस वजह से वह अपनी ड्यूटी पर ध्यान नहीं दे पा रहा था। मेरी फैमिली लाइफ भी डिस्टर्ब हो रही थी। इन कारणों से मैं डिप्रेशन में रहने लगा था। एसआई ने निक्की पर यह इल्जाम भी लगाया है कि ‘उसके संबंध मेरे अलावा और भी कई लोगों के साथ थे। एसआई ने लिखा है कि इन्हीं सब कारणों से वह अब जीवित रहना नहीं चाहता। उसने अपनी मां, पत्नी और दोनों बच्चों के बारे में लिखते हुए अपने परिवार से माफी मांगी है। यह स्यूसाइड नोट द्वारका नॉर्थ थाने की पुलिस ने केस फाइल में रख लिया है। बिजेंद्र के खिलाफ मर्डर और आर्म्स एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। एकमात्र मुलजिम की मौत होने की वजह से यह केस कोर्ट में चार्ज अबेटिड के तौर पर पेश किया जाएगा।

  • दलित छात्र की खुदकुशी (हैदराबाद)

    दलित छात्र की खुदकुशी (हैदराबाद)

    17 जनवरी 2016 दलित छात्र रोहित वेमुला का शव रविवार शाम एचसीयू के न्यू रिसर्च स्कॉलर्स हॉस्टल के एक कमरे में फंदे से लटका मिला था। आंध्रप्रदेश के गुंटूर जिले के रहने वाले रोहित को यूजीसी से जूनियर रिसर्च फैलोशिप (जेआरएफ) भी मिली थी।

    मुंबई ब्लास्ट के गुनहगार याकूब मेमन की फांसी पर पिछले साल हैदराबाद यूनिवर्सिटी में आंबेडकर स्टूडेंट्स असोसिएशन के प्रदर्शन से शुरू हुआ था। एबीवीपी ने आंबेडकर स्टूडेंट्स असोसिएशन के खिलाफ प्रोटेस्ट किया था। इस दौरान एबीवीपी नेताओं से मारपीट की गई थी। एबीवीपी नेताओं ने सिकंदराबाद से भाजपा सांसद और केंद्रीय मंत्री बंडारू दत्तात्रेय को ज्ञापन दिया था। इसके बाद रोहित समेत 5 स्टूडेंट्स को सस्पेंड कर हॉस्टल से निकाल दिया गया था। इसके खिलाफ ये स्टूडेंट्स 15 दिन से कैंपस में प्रोटेस्ट कर रहे थे। इसी दौरान रोहित रविवार रात को हॉस्टल रूम में पंखे से लटका मिला। इसके बाद स्टूडेंट्स भड़क गए। रोहित के कमरे से 5 पेज का स्यूसाइड नोट भी मिला।

    इस मामले में केंद्रीय मंत्री बंडारू दत्तात्रेय और यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर (वीसी) अप्पा राव के खिलाफ केस दर्ज किया गया। दोनों पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है। हैदराबाद के गाचीबावली थाने के इंस्पेक्टर जे. रमेश कुमार ने बताया, ‘कुछ छात्रों की शिकायत पर हमने केस दर्ज किया है। आईपीसी की धारा-306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) अनुसूचित जाति-जनजाति (अत्याचार रोकथाम) अधिनियम के तहत मामला है। केंद्रीय मंत्री दत्तात्रेय, एचसीयू के वीसी अप्पा राव, और विधानपार्षद (एमएलसी) रामचंद्र राव को आरोपी बनाया है। सुशील कुमार और रामकृष्ण नाम के दो छात्र भी आरोपी हैं।

    छात्रों के प्रति समर्थन जताने को कई नेताओ ने यूनिवर्सिटी दौरा किया इनमें दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, राहुल गांधी, सीताराम येचुरी, तृणमूल सांसद डेरेक ओ’ब्रायन और कांग्रेस के वी हनुमंत राव, भाकपा नेता एस. सुधाकर रेड्डी और डी राजा थे।

  • देवांश की मौत मामला (दिल्ली)

    देवांश की मौत मामला (दिल्ली)

    30 जनवरी 2016 को बसंत कुंज स्थित रायन इंटरनेशनल स्कूल के क्लास फ्स्ट का छात्र देवांश (6 वर्ष) का शव स्कूल के एम्फिथियेटर के नीचे बने वॉटर टैंक में मिला था।

    दिल्ली सरकार ने इस मामले मजिस्ट्रेट जांच का आदेश दिया था। देवांश के पिता रामहित मीणा ने अपने बेटे की मौत मे किसी साजिश की बात कही थी। उन्होने सरकार से सीबीआई जांच के साथ ही स्कूल मैनेजमेन्ट के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।

  • आरजू मर्डर केस (दिल्ली)

    आरजू मर्डर केस (दिल्ली)

    2 फरवरी 2016 की सुबह साढ़े आठ बजे आरजू [21] कॉलेज गई थी। कुछ दिनों पहले ही किंग्सेव कैंप स्थित एक इंस्टीट्यूट में उसने एडमिशन लिया था, उसकी एनीमेशन में हॉबी थी। चार बजे तक जब वह वापस नहीं आई तो परिवार वालों ने उससे कॉन्टैक्ट करने की कोशिश की। लेकिन उसका फोन बंद आ रहा था। परिवार वालों ने रिश्तेदार और दोस्तों से आरजू के बारे में पूछताछ की। कोई सुराग नहीं मिलने पर रात 11 बजे मॉडल टाउन थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। आरजू सिंह मॉडल टाउन इलाके के राजपुर गांव गुड़मंडी में 79/ए ब्लॉक में रहती थीं। उनके घर में पिता संजीव कुमार, मां कविता, बहन पायल और 12 साल के छोटे भाई कृष्ण हैं।

    अगले दिन परिवार वाले कॉलेज गए और आरजू की फ्रेंड से उनके बारे में पूछताछ की, उनसे पता चला कि 2 फरवरी की शाम को आरजू को उसका बॉयफ्रेंड नवीन खत्री कॉलेज से ले गया था। परिवार वाले नवीन के घर पहुंचे, नवीन की फैमिली ने उसके शादी में बिजी होने और आरजू के बारे में किसी तरह की जानकारी न होने की बात कह कर पल्ला झाड़ लिया। 5 फरवरी को बिंदापुर में नवीन की शादी हो गई। 6 फरवरी को पुलिस ने शक के आधार पर नवीन को थाने में बुलाकर कई घंटे पूछताछ की। पुलिस की पुछताछ में उसने हत्या की बात स्वीकार कर ली। नवीन ने पुलिस को बताया कि आरजू के साथ उसका कई साल से अफेयर था, वह उस पर शादी के लिए दवाब बना रही थी। नवीन की फैमिली इस शादी के खिलाफ थी। परिवार वाले उसकी दूसरी जगह शादी तय कर चुके थे।

    2 फरवरी को कॉलेज के बाहर से अपनी कार स्विफ्ट डिजायर में बिठाकर बातचीत के बहाने साथ ले गया। आईजीआई के पास नांगल देवत के जंगलों में दुपट्टे से गला दबाकर उसकी हत्या कर दी थी। पुलिस ने गुरुवार को एक डमी बॉडी का सहारा लिया। करीब 57 किलो की डमी को पुलिस अपने साथ लेकर नवीन के घर पहुंची। उसे डमी बॉडी की तरह पूरे क्राइम सीन में यूज किया गया। जिसके जरिए आरोपी नवीन के दावों की असलियत का पता लगाया गया।

  • आनंदी प्रत्यूषा बनर्जी खुदकुशी केस (मुबंई)

    आनंदी प्रत्यूषा बनर्जी खुदकुशी केस (मुबंई)

    1 अप्रैल 2016 को मशहूर टीवी सीरियल ‘बालिका वधू’ की आनंदी यानी प्रत्यूषा बनर्जी ने शुक्रवार को खुदकुशी कर ली। 24 साल की प्रत्यूषा कांदिवली के अपने घर में पंखे से लटकी मिलीं। उन्हें कोकिलाबेन अस्पताल पहुंचाया गया जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया था।

    10 अगस्त 1991 को जमशेदपुर में जन्मीं प्रत्यूषा रियलिटी टीवी शो ‘झलक दिखला जा’ के 5वें और ‘बिग बॉस’ के 7वें सीजन में भी नजर आई थीं। प्रत्यूषा अपने बॉयफ्रेंड राहुल के साथ रहती थी।

  • पूजा तिवारी मर्डर मिस्ट्री (फरीदाबाद)

    पूजा तिवारी मर्डर मिस्ट्री (फरीदाबाद)

    इंदौर की रहने वाली पूजा तिवारी एक अंग्रेजी वेब पोर्टल में सीनियर रिपोर्टर थी। पूजा ने भ्रूण हत्या पर स्टिंग किया था। डा. अनिल गोयल ने पूजा उसके सहयोगी अनुज मिश्रा पर एक्सटोर्सन के आरोप में थाना सेंट्रल में 8.4.2016 को एफआईआर दर्ज कराई थी। तब पूजा अकेले एनएच-5बी ब्लॉक में किराए के मकान में रहती थी। बाद में वह सद्भावना अपार्टमेंट में गई।

    1 मई 2016 की शाम को फ्लैट संख्या 509 में पूजा, उसके दोस्त इंस्पेक्टर अमित और आमरीन खान मौजूद थे। 1-2 मई की मध्य रात्रि यानी 1.10 बजे पूजा की बॉलकनी से नीचे गिरकर मौत हो गई थी। पुलिस ने पूजा के पिता रवि तिवारी के बयान पर आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में चिकित्सक दंपती डा. अनिल गोयल, अर्चना गोयल और डा. धवल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। प्रारंभिक बयान चश्मदीद अमित और आमरीन के लिए गए। दोनों के बयानों में समानता नहीं थी। आमरीन के कोर्ट में 164 के तहत बयान हुए, जो प्रारंभिक बयान और बाद के बयानों से भिन्न है थे। पूजा के खून में 46 परसेंट अल्कोहल की पुष्टि हुई थी, अमित ने शराब नहीं पी रखी थी।

  • हिमांशी की मौत (गाजियाबाद)

    हिमांशी की मौत (गाजियाबाद)

    06 अप्रैल 2016 कविनगर थाना क्षेत्र के संजय नगर सेक्टर 23 बी-61 निवासी बीएसपी के राज्यसभा सांसद नरेंद्र कश्यप की पुत्रवधु हिमांशी (24) की बुधवार सुबह संदिग्ध परिस्थितियों में गोली लगने से मौत हो गई थी। सांसद के सेक्टर-23 स्थित आवास में हिमांशी बाथरूम में खून से लथपथ हालत में मिली थी। परिजनों के अनुसार पति डॉ. सागर कश्यप की लाइसेंसी रिवॉल्वर से हिमांशी ने खुद को गोली मार ली।

    हिमांशी के पिता हीरालाल कश्यप ने दहेज हत्या का दावा करते हुए सांसद नरेंद्र कश्यप सहित परिवार के 6 सदस्यों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस ने सांसद समेत अन्य आरोपियों को अरेस्ट कर जेल भेज दिया था। पहले, सेशन कोर्ट ने नरेंद्र कश्यप की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद नरेंद्र कश्यप के वकीलों ने जमानत के लिए हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। जस्टिस बच्चू लाल ने नरेंद्र कश्यप की जमानत अर्जी को स्वीकार करते हुए उन्हें राहत दी, उन्हे हाई कोर्ट से 3 महीने बाद जमानत मिली।

  • तंजील अहमद हत्याकांड (बिजनौर उ.प्र.)

    तंजील अहमद हत्याकांड (बिजनौर उ.प्र.)

    2 अप्रैल 2016 को एनआईए अफसर तंजील की शादी से लौटते वक्त बिजनौर में हत्या कर दी गई थी। वह कार से घर लौट रहे थे। कार में उनकी पत्नी और बच्चे भी थे। बदमाशों ने रास्ते में रोककर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई थीं। 24 गोलियां लगने से तंजील की मौके पर ही मौत हो गई जबकि उनकी पत्नी फरजाना ने 10 दिन बाद एम्स में दम तोड़ दिया था।

    मुख्य आरोपी और 2 लाख रुपये के इनामी बदमाश मुनीर की तलाश में एटीएस, एसटीएफ, एनआईए समेत करीब 10 एजेंसियां एक-दूसरे के साथ तालमेल के साथ काम कर रही थीं। मुनीर किसी तरह के कम्युनिकेशन डिवाइस का यूज नहीं कर रहा था, इसलिए उसे ट्रेस करने में बेहद परेशानी हो रही थी। लिहाजा टीम ने मुखबिर तंत्र के जरिए उसकी तलाश की। सूचना मिली कि वह गाजियाबाद के क्रॉसिंग रिपब्लिक एरिया में छुपा है और मुंबई फरार होने की फिराक में है। सोमवार शाम से टीम पूरी रात उसकी तलाश में जुटी रही। मंगलवार सुबह ग्रेटर नोएडा वेस्ट में बिसरख के पास मुठभेड़ के बाद बाइक से जा रहे मुनीर निवासी सहसपुर बिजनौर व उसके साथी अदनान शकील उर्फ सफर शेख उर्फ राजा साहब निवासी आंबेडकर नगर को अरेस्ट कर लिया गया। आरोपियों के पास से दो पिस्टल, एक रिवॉल्वर, कारतूस, पल्सर बाइक और 90 हजार रुपये कैश मिले।

  • जानें कैसे होती है बेल।

    जानें कैसे होती है बेल।

    बेल मतलब जमानत।

    जमानती अपराध- कानूनी के जानकारों के अनुसार, अपराध दो तरह के होते हैं, जमानती और गैर जमानती। जमानती अपराध में मारपीट, धमकी, लापरवाही से गाड़ी चलाना, लापरवाही से मौत जैसे मामले आते हैं। इस तरह के मामले में थाने से ही जमानत दिए जाने का प्रावधान है। आरोपी थाने में बेल बॉन्ड भरता है और फिर उसे जमानत दी जाती है।

    गैर जमानती अपराध- गैर जमानती अपराधों में लूट, डकैती, हत्या, हत्या की कोशिश, गैर इरादतन हत्या, रेप, अपहरण, फिरौती के लिए अपहरण आदि अपराध हैं। इस तरह के मामले में कोर्ट के सामने तमाम तथ्य पेश किए जाते हैं और फिर कोर्ट जमानत का फैसला लेता है।

    कानून विशेषज्ञों के अनुसार,  अगर पुलिस समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं करे, तब भी आरोपी को जमानत दी जा सकती है, चाहे मामला बेहद गंभीर ही क्यों न हो। ऐसे अपराध जिसमें 10 साल या उससे ज्यादा सजा का प्रावधान है, उसमें गिरफ्तारी के 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करना जरूरी है। अगर इस दौरान चार्जशीट दाखिल नहीं की जाती है तो आरोपी को सीआरपीसी की धारा-167 (2) के तहत जमानत दिए जाने का प्रावधान है। वहीं 10 साल कैद की सजा से कम वाले मामले में 60 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करनी होती है और नहीं करने पर जमानत का प्रावधान है।

    गिरफ्तारी से बचने के लिए कई बार आरोपी कोर्ट के सामने अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल करता है, कई बार अंतरिम जमानत की मांग करता है या फिर रेग्युलर बेल के लिए अर्जी दाखिल करता है। जब किसी आरोपी के खिलाफ ट्रायल कोर्ट में केस पेंडिंग होता है, तो उस दौरान आरोपी सीआरपीसी की धारा-439 के तहत अदालत से जमानत की मांग करता है। ट्रायल कोर्ट या हाई कोर्ट केस की मेरिट आदि के आधार पर अर्जी पर कोर्ट फैसला लेता है। इस धारा के तहत आरोपी को अंतरिम जमानत या फिर रेगुलर बेल दी जाती है। इसके लिए आरोपी को मुचलका भरना होता है और निर्देशों का पालन करना होता है। अगर आरोपी को अंदेशा हो कि अमुक मामले में वह गिरफ्तार हो सकता है, तो वह गिरफ्तारी से बचने के लिए धारा-438 के तहत अग्रिम जमानत की मांग कर सकता है। कोर्ट जब किसी आरोपी को जमानत देता है, तो वह उसे पर्सनल बॉन्ड के अलावा जमानती पेश करने के लिए कह सकता है। अगर 10 हजार रुपये की राशि का जमानती पेश करने के लिए कहा जाए तो आरोपी को इतनी राशि की जमानती पेश करना होता है।

    पैरोल

    पैरोलः पैरोल भी कैदियों से जुड़ा एक टर्म है। इसमें कैदी को जेल से बाहर जाने के लिए एक संतोषजनक/आधार कारण बताना होता है। प्रशासन, कैदी की अर्जी को मानने के लिए बाध्य नहीं होता। प्रशासन कैदी को एक समय विशेष के लिए जेल से रिहा करने से पहले समाज पर इसके असर को भी ध्यान में रखता है। पैरोल एक तरह की अनुमति लेने जैसा है। इसे खारिज भी किया जा सकता है।

    पैरोल दो तरह के होते हैं। पहला कस्टडी पैरोल और दूसरा रेग्युलर पैरोल।

    कस्टडी पैरोलः जब कैदी के परिवार में किसी की मौत हो गई हो या फिर परिवार में किसी की शादी हो या फिर परिवार में कोई सख्त बीमार हो, उस वक्त उसे कस्टडी पैरोल दिया जाता है। इस दौरान आरोपी को जब जेल से बाहर लाया जाता है तो उसके साथ पुलिसकर्मी होते हैं और इसकी अधिकतम अवधि 6 घंटे के लिए ही होती है।

    रेग्युलर पैरोलः रेग्युलर पैरोल दोषी को ही दिया जा सकता है, अंडर ट्रायल को नहीं। अगर दोषी ने एक साल की सजा काट ली हो तो उसे रेग्युलर पैरोल दिया जा सकता है।

    क्या होता है फरलो ?

    फरलोः फरलो एक डच शब्द है। इसके तहत कैदी को अपनी सामाजिक या व्यक्तिगत जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए कुछ समय के लिए रिहा किया जाता है। इसे कैदी के सुधार से जोड़कर भी देखा जाता है। दरअसल, तकनीकी तौर पर फरलो कैदी का मूलभूत अधिकार माना जाता है। 

    पैरोल मिलने के कानूनी नियम

    1. पूर्ण और असाध्य अंधापन।

    2. कोई कैदी जेल में गंभीर रूप से बीमार है और वो जेल के बाहर उसकी सेहत में सुधार होता है।

    3. फेफड़े के गंभीर क्षयरोग से पीड़ित रोगी को भी पैरोल प्रदान की जाती है। यह रोग कैदी को उसके द्वारा किए अपराध को आगे कर पाने के लिए अक्षम बना देता है। या इस रोग से पीड़ित वह कैदी उस तरह का अपराध दोबारा नहीं कर सकता, जिसके लिए उसे सजा मिली है।

    4. यदि कैदी मानसिक रूप से अस्थिर है और उसे अस्पताल में इलाज की जरूरत है।

    साथ ही भारत के अंदर कई असाधारण मामलों में भी कैदी को पैरोल दी जा सकती है।

    1. अंतिम संस्कार के लिए।

    2. कैदी के परिवार का कोई सदस्य बीमार हो या मर जाए।

    3. किसी कैदी को बेटे, बेटी, भाई और बहन की शादी के लिए।

    4. घर का निर्माण करने या फिर क्षतिग्रस्त घर की मरम्मत के लिए।

  • 500 के असली-नकली नोट की पहचान के तरीकें।

    500 के असली-नकली नोट की पहचान के तरीकें।

    रुपये 500/= के असली नोट की पहचान करने के 10 आसान तरीकें –

    1. पुष्प डिजाइन में लिखा 500 आधा रास्ता है यदि आप इसे प्रकाश की ओर देखें तो यह पूरा 500 दिखाई देता है।

    2. नोट की खाली जगह को अगर प्रकाश की ओर करके देखा जाए तो उसमें महात्मा गांधी का चित्र प्रदर्शित होता है।

    3. नोट के बीच में पांच सौ रुपये छपा है इसकी स्याही छूने पर महसूस होती है इसी स्याही से भारतीय रिजर्व बैंक भी लिखा है।

    4. नोट के बीच में लिखा 500 हरे रंग का होता है लेकिन इसे एक खास कोण पर झुकाया जाए तो यह नीले रंग का दिखाई देता है।

    5. नोट के नीचे जिस पर नोट की संख्या मुद्रित होती है वह परबैगनी प्रकाश में चमकती है।

    6. नोट के बीचो बीच एक सिल्वर धागा आधा दिखाई देता प्रतीत होता जबकि प्रकाश में देखने पर यह पूरा दिखाई देता है इस पर आरबीआई लिखा रहता है।

    7. नोट के नीचे आरबीआई के गर्वनर के हस्ताक्षर प्रकाशित होता है।

    8. अशोक प्रतीक के ऊपर एक छोटा गोला है। यह गोला विशेष स्याही से बना है जो छूने से महसूस किया जा सकता है।

    9. महात्मा गांधी के चित्र के पीछे आरबीआई और 500 काफी छोटे अक्षरों पर छपा होता है।

    10. गांधी जी के बगल में हरी पट्टी पर बने फूल के बीच 500 लिखा है जो नोट को हल्का झुकाने पर दिखाई देता है।