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  • हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत पर जारी की गाइडलाइन।

    हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत पर जारी की गाइडलाइन।

    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश में अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल करने की गाइडलाइन जारी की है। कोर्ट ने कहा है कि अग्रिम जमानत अर्जी पर पांच रुपये का स्टैम्प लगेगा। गिरफ्तारी की आशंका वाले व्यक्ति की अर्जी हलफनामे के साथ दाखिल होगी।

    अर्जी के दूसरे प्रस्तर में केस क्राइम नंबर, थाना, अपराध की धाराएं दर्ज होंगी। जबकि गैर जमानती अपराध में गिरफ्तारी की आशंका की वजह बतानी होगी। अर्जी के तीसरे प्रस्तर में यह लिखना होगा कि अपराध सीआरपीसी की धारा 438 की उपधारा 6 के अंतर्गत नहीं है। इसी प्रकार अर्जी के चौथे प्रस्तर में यह लिखना होगा कि इससे पहले उसने हाईकोर्ट या किसी अन्य अदालत में अर्जी दाखिल नहीं की है। पांचवे प्रस्तर में यह लिखना होगा कि क्या सत्र न्यायालय में कोई अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल की गयी है, तो उसकी स्थिति क्या है, उससे जुड़ा दस्तावेज भी लगाया जाए। विशेष कार्याधिकारी (आपराधिक) ने एक जुलाई 2019 को इस आशय का आदेश जारी किया है।

    Reference:  दैनिक जागरण, 05 जुलाई 2019, पेज 06

  • प्रदेश में अग्रिम जमानत व्यवस्था फिर से लागू।

    प्रदेश में अग्रिम जमानत व्यवस्था फिर से लागू।

    लखनऊ। अब प्रदेश में गैरजमानतीय अपराध के मुकदमे में गिरफ्तारी पर अग्रिम जमानत मिल सकेगी। मंगलवार को प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार ने बताया कि दंड प्रक्रिया संहिता 1973 में अग्रिम जमानत संबंधित धारा-438 को फिर से लागू करने के विधेयक का राष्ट्रपति से मंजूरी मिल गई है।

    इस व्यवस्था को वर्ष 1976 में आपातकाल के दौरान खत्म कर दिया गया था। बाद में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को छोड़कर अन्य राज्यों में अग्रिम जमानत की व्यवस्था बहाल कर दी गई थी। प्रदेश में भी इस व्यवस्था को फिर से लागू करने की मांग हो रही थी, जिसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने प्रमुख सचिव गृह की अध्यक्षता में समिति का गठन किया। समिति की रिपोर्ट में की गई सिफारिश के आधार पर दंड प्रक्रिया संहिता संशोधन विधेयक-2018 विधानमंडल में पारित कराकर राष्ट्रपति की अनुमति के लिए भेजा गया था, जिसे राष्ट्रपति ने गत एक जून 2019 को अनुमति प्रदान कर दी गई। संशोधन अधिनियम गत छह जून 2019 से लागू हो गया है। अब अग्रिम जमानत की सुनवाई के दौरान अभियुक्त का उपस्थित रहना जरूरी नहीं होगा। संबंधित मुकदमे में पूछताछ के लिए जब बुलाया जाएगा तब पुलिस अधिकारी या विवेचक के समक्ष उपस्थित होना पड़ेगा। इसके अलावा मामले से जुड़े गवाहों व अन्य व्यक्तियों को न धमका सकेंगे और न ही किसी तरह का आश्वासन देंगे।

    एससी-एसटी एक्ट में नहीं मिलेगी अग्रिम जमानत।
    अग्रिम जमानत की व्यवस्था एससी-एसटी एक्ट समेत अन्य गंभीर अपराध के मामलों में लागू नहीं होगी। आतंकी गतिविधियों से जुड़े मामलों (अनलाफुल एक्टिविटी एक्ट 1967), आफिशियल एक्ट, नारकोटिक्स एक्ट, गैंगस्टर एक्ट व मौत की सजा से जुड़े मुकदमों में अग्रिम जमानत नहीं मिल सकेगी।

    30 दिन में करना होगा निस्तारण

    विधेयक के तहत अग्रिम जमानत के लिए जो भी आवेदन आएंगे उनका 30 दिन के अंदर निस्तारण करना होगा। कोर्ट को अंतिम सुनवाई से सात दिन पहले नोटिस भेजना भी अनिवार्य होगा। अग्रिम जमानत से जुड़े मामलों में कोर्ट अभियोग की प्रकृति, गंभीरता, आवेदक के इतिहास, उसकी न्याय से भागने की प्रवृत्ति आदि पर विचार करके फैसला दिया जाएगा।

    Reference: दैनिक जागरण, 12 जून, 2019, पेज 02

  • साथी को कैंसर हुआ, पुलिसकर्मियों ने दिए 2.31 लाख।

    साथी को कैंसर हुआ, पुलिसकर्मियों ने दिए 2.31 लाख।

    साहिबाबाद। महीना रमजान का है और ईद का इंतजार खुशियां ही देता है, लेकिन शहर के तुलसी निकेतन चौकी पर तैनात कॉन्स्टेबल मंसूर और उनके परिवार के जेहन में शायद ही किसी त्योहार का इंतजार बसा हो। वजह यह है कि ड्यूटी के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ी और जांच हुई तो पता चला कि वे कैंसर की चपेट में है। अकेले कमाने वाले मंसूर के परिवार पर आर्थिक संकट आया तो पुलिस महकमा साथ नजर आया। थाने में तैनात 213 पुलिसकर्मियों ने मिलकर उनके पिता को तुरंत ही दो लाख 31 हजार रुपये की सहायता दी और आगे भी सहयोग का भरोसा दिया। कैंसर जैसी बीमारी के सामने यह रकम भले छोटी है, लेकिन इस परिवार के लिए विश्वास से भरी ईदी से कम नहीं है। साथियों ने उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की है।

    हरदोई में लगी थी चुनाव ड्यूटी, वहीं बिगड़ी तबीयत।

    दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती कॉन्स्टेबल मंसूर ने बताया कि लोकसभा चुनाव में वे हरदोई में तैनात थे। यहां तबीयत बिगड़ने पर उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। बाद में उन्होंने गाजियाबाद के अस्पताल में परीक्षण कराया तो ब्लड कैंसर की पुष्टि हुई। अफसरों ने उन्हें जिला एमएमजी अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन तबीयत बिगड़ने पर एम्स (दिल्ली) रेफर कर दिया गया। वहां बेड न मिलने पर वे 24 मई को सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती हो गए। मंसूर के पिता मुरादाबाद के गांव उमरीकलां में खेती करते हैं। डॉक्टरों ने इलाज में 20 से 22 लाख रुपये खर्च बताया है। पिता अभी तक पौने 3 लाख रुपये इलाज में लगा चुके हैं। उनके परिवार में अम्मी-अब्बू, पत्नी रन्नूम, ढाई साल की बेटी फातिमा, चार महीने की बेटी कातिजा व 6 अन्य भाई भी हैं। परिवार की देखभाल की जिम्मेदारी मंसूर पर ही है।

    फरिश्ता साबित हुआ महकमा।

    परेशानी के इस दौर में मंसूर के परिवार के पुलिस महकमा फरिश्ता साबित हुआ है। सीओ साहिबाबाद डॉ.राकेश मिश्रा ने बताया कि इस स्थिति का पता चलते ही थाने और चौकियों पर तैनात 213 पुलिसकर्मियों ने अपनी सैलरी से अंशदान किया और 2 लाख 31 हजार उनके पिता को सौंपे। पुलिस विभाग आगे भी उनकी सहायता करता रहेगा।

    Reference: नवभारत टाइम्स, 5 जून 2019, पेज 03

  • Crime chief श्री जितेन्द्र शर्मा जी !!

    Crime chief श्री जितेन्द्र शर्मा जी !!

    Face to Face में हमारे मेहमान है News 24 हिन्दी न्यूज चैनल के Crime Chief श्री जितेन्द्र शर्मा जी, उनसे की गयी बातचीत के कुछ अंश- 

    प्रश्न:- जितेन्द्र जी आप अपने बारे  में बतायें

    उत्तर- मैं News 24  न्यूज चैनल में बतौर Crime Chief कार्यरत हूं। मेरे कैरियर को अभी 8 साल हुए है। मैं उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के गांव जलालाबाद का रहनेवाला हूं, परन्तु मेरी पैदाईश दिल्ली की है 1968 में हमारी फैमिली शाहदरा आ गए थे और तब से हम लोग यही पर रहे है।

    प्रश्न:- आपको मी़ड़िया में आने की प्रेरणा कहां से मिली?

    उत्तर- दरअसल, मेरे फादर मीडि़या में है और वे टाइम्स ऑफ इंडिया में बतौर डिजाइनर काम कर रहे है। घर में मीड़िया का माहौल था तो मेरा भी झुकाव धीरे धीरे इस और हो गया। फिर मैने 2002 में भारतीय विद्या भवन, दिल्ली से मॉसकोम की डिग्री ली। फिर इस फील्ड में काम करना शुरु किया।

    प्रश्न:- Professional सफर के बारे कुछ बताइयें?

    उत्तर- 2002 में बिन्दु शर्मा और आदर्श रस्तौगी जी के अंडर में इंर्टनशिप की बीएजी में, इसके बाद नबभारत टाइम्स गया और वहां हरियाणा डेस्क पर काम किया। 2003 में मैने बतौर क्राइम रिपोर्टर शाह टाइम्स अखवार को जोइंन किया, वहां मैने मुकुंद शाही जी के साथ काम किया। इसके बाद मै अमर उजाला से जुड़ा यहां मै अरविंद शर्मा जी के साथ काम किया। इसके बाद 2005 मैं सनसनी में काम करने के लिए बीएजी को जोइंन किया और तभी से यही पर काम कर रहा हूँ।    

    प्रश्न:- अपनी क्राइम की Exclusive स्टोरियों के बारे मे कुछ बताइये?

    उत्तर- एनसीआर के “थानों में अवैध वसूली” की एक वड़ी स्टोरी की थी जिसमें 14 इंस्पेक्टरों के तबादले हुए और 14 पुलिस वाले स्पेंड हुए थें। इसके अलावा इटावा की लेड़ीज डकैतों के इंटरव्यू, भ्रष्टाचार और क्राइम की स्टोरियां, स्टिंग आपरेशन आदि।     

    प्रश्न- सर, क्या आपको लगता है कि IPC और CRPC में बदलाव की जरुरत है?

    उत्तर-  देखियें इस बारें में कुछ नही कह पाउंगा लेकिन दहेज की जो धारा है उसमें जरुर बदलाब की जरुरत है क्योकिं इस धारा का बहुत मिसयूज हो रहा है। इस 498ए धारा का गलत इस्तेमाल कर लोगो को परेशान किया जा रहा है। इसमें जरुर एमंडमेन्ड होना चाहियें।

    प्रश्न- देश में दिन प्रतिदिन बढ. रहे क्राइम के बारे में आप क्या कहेगें? खासतौर से अगर हम एनसीआर की बात करें तो…

    उत्तर-  देखियें एनसीआर में जिस तरह से एकदम से लूट, अपहरण की घटनाएं जो बढ़ी है उसमें पुलिस को कम करने की कोशिश करनी चाहियें, लेकिन अभी जो आकडे़ हम देख रहें है उससे कही ज्यादा आकड़े होते है। परन्तु पुलिस अपने क्राइम डाटा को कम दिखाने की लिए FIR तक दर्ज नही करती है।

    प्रश्न-  क्राइम की स्टोरी करते हुए कभी डर लगा? जब आप किसी की पोल खोलते हो।

    उत्तर-  अभी तक तो नही लगा, पर कोशिश यही रहती है कि कुछ ऐसी स्टोरी की जाय जिसमें डर लगने वाली बात हो, परन्तु अभी तक तो डर नही लगा। और आजतक मैने किसी भी स्टोरी को अवोइड़ भी नही किया चाहे वह कितनी भी बड़ी स्टोरी हो और उसमें चाहे कोई भी नेता हो या अफ्सर कोई भी हो, और अगर वह आम जनता के हित से जुडी़ है तो मैं उस स्टोरी को जरुर करता हूँ।

    प्रश्न- अगर क्राइम कंट्रोल करने के लिए आपको पूरी पावर दे दी जाय तो आपकी क्या रणनीति होगी (आप क्या सुझाव देगें)। (…जैसे की अगर मैं प्रधानमंत्री होता तो ये करता वो.. करता….)

    उत्तर- अगर क्राइम कंटोल करना है तो सबसे पहले पुलिस पैट्रोलिंग पर ध्यान देना होगा और पुलिस को थानों से बाहर निकल कर काम करना होगा। एफआईआऱ को समय रहते दर्ज करना होगा।

    प्रश्न- परिवार में कौन कौन है।

    उत्तर- फेमिली में पैरेन्टस है, मेरे फादर टाइम्स ऑफ इंडिया में बतौर डिजाइनर है, मदर दिल्ली एडमिनिस्ट्रेशन में है। मैं मैरिड़ हूं, मेरी वाइफ गर्वमेन्ट स्कूल में टीचर है।

    प्रश्न- आप वेजीटेरियन है या नान वेजीटेरियन है?

    उत्तर- मै प्योर वेजीटेरियन हूं।

    प्रश्न- आपका पसंदीदा व्यंजन कौन सा है?

    उत्तर- मीठे का मै बहुत शौकिन हूं और खीर मुझे बहुत पसंद है, हफ्ते में एक-दो बार बन ही जाती है।

    प्रश्न- फैवरिट टाइम पास क्या है।

    उत्तर- दोस्तों के मिलना जुलना और वातचीत करना अच्छा लगाता है।

    प्रश्न- रोज की भागती दौड़ती जिदंगी में आपका फिटनेस मंत्र क्या है।

    उत्तर- फिटनेस के लिए बहुत ज्यादा तो नही पर सुबह थोड़ी एक्सरसाइज और योगा करता हूं और क्राइम एक ऐसी बीट है जिसमें काफी भागदौड़ रहती है तो सारे दिन एक्सरसाइज तो होती रहती है।

    प्रश्न- जितेन्द्र जी, आपकी छुट्टी मनाने के लिए पसंदीदा जगह कौन सी है?

    उत्तर- नैनीताल मेरी पसंदीदा जगह है, वहां के जो सात ताल है वहां मुझे घूमना बहुत पसंद है और मेरी कोशिश रहती है कि ऐसे रिजोर्ड में ठहरा जाय जहां ज्यादा भीडभाड़ न हो जिससे अपनी फैमिली के साथ अच्छा वक्त बिताया जा सकें। उसके बाद मेरी पसंदीदा जगह है मसूरी… मनाली मैं जाना चाहता हूँ पर इतनी छुट्टियां नही मिल पाती की वहां जाया जाय।

    प्रश्न- एक आखरी सवाल, आप किस तरह के लोगो को पसंद करते है?

    उत्तर- दोस्ती ऐसे लोगो से करना चाहूगां… जैसे अंदर से है वैसे बाहर से हो, ये नही दिल में कुछ और दबाकर बैठे हो और बाहर कुछ और दिखाते हो… जैसे है वैसे ही दिखायें ताकि दोस्ती लॉग टर्म चलें। दोस्ती में किसी तरह के मकसद या लालच नही होना चाहियें।

  • हिन्दी न्यूज चैनल News18 के श्री अमित पांडे जी

    हिन्दी न्यूज चैनल News18 के श्री अमित पांडे जी

    इस बार Face to Face में हमारे मेहमान है Network18 के हिन्दी न्यूज चैनल News18 India के श्री अमित पांडे जी, उनसे की गयी बातचीत के कुछ अंश-

    प्रश्न:- अमित जी आप अपने बारे में बताइये?
    उत्तर- पिछले 15 सालों से मैं इस संस्था से जुड़ा हूं। उससे पहले दो साल तक मैंने बतौर एसोसिएट प्रोडयूसर जी न्यूज में काम किया। मैंने पत्रकारिता की डिग्री भारतीय जनसंचार संस्थान से की है। दिल्ली युनिवर्सिटी से बीकॉम किया है और स्कूलिंग सिंधिया स्कूल ग्वालियर से की है। मैं रहनेवाला उत्तर प्रदेश के भदोही जिले का हूं।

    प्रश्न:- आपको मी़ड़िया में आने की प्रेरणा कहां से मिली?
    उत्तर- प्रेरणा तो किसी से नहीं मिली लेकिन कुछ खासियत हैं जिस वजह से मैं इस फील्ड में आया। मैं समझता हूं कि इस पेशे से समाज को मैं कुछ दे सकता हूं और हर दिन इस फील्ड में एक इंतिहान जैसा होता है….तो मैं समझता हूं कि अपनी काबलियत साबित करने के लिए इससे बेहतर पेशा इंसान के लिए कोई और नहीं है क्योंकि जनता के सामने आपके व्यक्तित्व का आइना झलकता है।

    प्रश्न:- आप अपनी क्राइम की स्टोरियों के बारे मे कुछ बताइये?
    उत्तर- आरुषि मर्डर केस, दिल्ली के सीरियल बम धमाके, निठारी नरसंहार, एसीपी राजबीर हत्याकांड कुछ ऐसी घटनाएं हैं जिन्होने मेरे कैरियर को एक नई दिशा दी। इन स्टोरियों ने जीवन के हर एक बिन्दुओं को छुआ। क्राइम, कोर्ट, समाज, इनवेस्टिगेशन, खौफ, थ्रिल….जीवन से जुड़ा हर एक पहलू इन स्टोरियों में देखा जा सकता है।

    प्रश्न:- आप अपने Professional सफर के बारे कुछ बताइयें?
    उत्तर- मैने अपने कैरियर की शुरुआत बतौर ट्रेनी जी न्यूज़ में 2003 मई में की। यहां मैने क्राइम फाइल और क्राइम रिपोर्टर प्रोग्राम बनाया। करीब दो साल बाद मैने चैनल सेवन बतौर करेसपांडेन्ट ज्वाइन किया। तबसे मैं यहीं पर कार्यरत हूं।

    प्रश्न- क्या IPC और CRPC में बदलाव की जरुरत है?
    उत्तर- हमारे कानून बहुत ज्यादा पुराने हैं उनकी जरूरत आज के समय के हिसाब से बहुत बदल गई है इसलिए आईपीसी और सीआरपीसी में बदलाव की तो जरूरत है ही, साथ ही हमारी न्यायपालिका को भी अब ऐसा बन जाना चाहिए कि आम आदमी को तुरंत और आसानी से इंसाफ मिल सके।

    प्रश्न- देश में दिन प्रतिदिन बढ़ रहे क्राइम के बारे में आप क्या कहेगें?
    उत्तर- क्राइम पहले भी होता था और अब भी रहा है। फर्क ये है कि जनसंख्या में बढ़ोत्तरी के साथ साथ उसका अनुपात भी बढ़ गया है और इन अपराधों की रिपोर्टिंग ज्यादा हो रही है। बढ़ते हुए अपराध के लिए समय के हिसाब से हमारी सामाजिक व्यवस्था का न ढल पाना एक बड़ी वजह है। इसीलिए नए तरह के अपराध मसलन साइबर क्राइम, मनी लांडरिंग, बिल्डर द्वारा धोखाधड़ी जैसे अपराध अपने उफान पर हैं और इनसे मुकाबला करने के लिए हमारी पुलिस व्यवस्था को भी बेहतर तैयारी कर लेनी चाहिए।

    प्रश्न- Crime की स्टोरी कवर करते हुए आपको किस तरह की परेशानियां आती है?
    उत्तर- स्टोरी की डेडलाइन मीट करना सबसे बड़ी चुनौती है। और उसके साथ जो सब्जेक्ट है उसी के अनुसार मेरी स्टोरी बने। इसके अलावा फील्ड पर बराबर खतरा रहता है असमाजिक तत्वों से जो शूट के दौरान व्यवधान पैदा करते हैं। जनता की भावनाओं के अनुरूप मेरी स्टोरी का मैसेज हो ये भी बहुत मुश्किल भरा काम है।

    प्रश्न- आप वेजीटेरियन है या नान वेजीटेरियन है, और आपका पसंदीदा व्यंजन कौन सा है?
    उत्तर- मै प्योर वेजीटेरियम हूं और राजमा चावल मुझे बहुत पसंद है।

    प्रश्न- पांड़े जी, आपकी छुट्टी मनाने के लिए पसंदीदा जगह कौन सी है?
    उत्तर- पहाड़ों में जहां माहौल शांत और ठंडा हो ताकि प्रकृति के पास रहकर मन को थोड़ा सुकून मिले।

    प्रश्न- अमित जी, आपका फैवरिट टाइम पास क्या है?
    उत्तर-परिवार और करीबियों के साथ ज्यादा से क्वालिटी टाइम बिता सकूं।

    प्रश्न- रोज की भागती दौड़ती जिदंगी में आपका फिटनेस मंत्र क्या है?
    उत्तर- फिटनेस का मूल मंत्र है कि “किसी भी बात को लेकर टेंशन न लें और किसी भी बात को दिल पर न लगाएं ”।

    प्रश्न- पांडे़ जी आप किस तरह के लोगो को पसंद करते है?
    उत्तर- स्ट्रेट फॉरवर्ड लोग जो सामने वाले को समझ सकें।

  • मंगेश बापट जी, News18 India

    मंगेश बापट जी, News18 India

    इस बार Face to Face में हमारे मेहमान है मीड़िया जगत की वो मशहूर हस्ती, जो किसी परिचय की मौहताज नही जिन्होने देश के पहले का्इम शो की Editing कर मीड़िया की खबरों को एक नया आयाम दिया, श्री मंगेश बापट, उनसे की गयी बातचीत के कुछ अंश-

    प्रश्न:- मंगेश जी आप अपने बारे में बताइये?
    उत्तर :- मै महाराष्ट्र से हूँ, पर मेरी पैदाइश लखनऊ की है और मैं यही पर पला-पढ़ा हूँ। मैने मेरठ यूनीवर्सिटी से 1988 में ग्रेजुएशन किया है, और फिर पोस्ट ग्रेजुएट इन कम्पयूटर ऐपलिकेशन करने के बाद, अपने कैरियर की शुरुआत एक कंम्पयूटर कम्पनी से की।

    प्रश्न:- मी़ड़िया में आने की प्रेरणा कहां से मिली?
    उत्तर:- ये उस समय की बात है 1985-86 की, गर्मियों की छुट्टियों में हम लोग दूरदर्शन जाया करते थे शौकिया, प्रोग्राम में हिस्सा लेने, तो उस दौरान उन्होने मुझे एक दो छोटे-छोटे प्रोग्राम दिये थें जिसमें मैने एज ए एंकर और एनाउनंसर काम किया। उस दौरान जो शौकिया काम हमने किया था, तो मुझे यह लगा कि यह फील्ड़ बड़ा अच्छा है चूंकि इसमे कम लोग जाते थे और मै कंम्पयूटर फील्ड़ से था लेकिन जब मुझे चांस मिला तो मैने इसी को अपना प्रोफेशन बना लिया। इसके बाद मैने एक Production House को जोइन कर लिया और वहां काम करते हुए सब कुछ सीखा।

    प्रश्न:- आप अपने समय की क्राइम की स्टोरियों के बारे मे कुछ बताइये?
    उत्तर:- देखियें अगर मै 1990-91 की बात करु तो उस समय एक दूरदर्शन ही था और क्राईम के As such कोई dedicated show नही हुआ करते थे। दूरदर्शन की ऐसी नीतियां थी कि वो क्राईम जैसे सब्जेक्ट को Glorify नही करना चाहते थे। हमारे एक मित्र थे सुहेल इलयासी, उन्होने वहां कुछ विदेशी चैनलों पर कुछ क्राइम शो देखें थे, तो उन्होने मुझे बुलाया और एक क्राइम शो कि वीडि़यो कैसट दिखाई जो एक क्राइम शो की थी, और कहा कि कुछ इस तरह का शो हम India में करना चाहते है, तो मुझे उसमे कुछ इंन्ट्रेस्ट लगा क्योकि उसमें re-construction था और कुछ हिस्सों को एनेक्ट करना था, तो मै उस टीम का हिस्सा बन गया। और भारत के पहले हाफ एन आवर क्राइम शो “India Most Wanted” के नाम से बनाया जो कि जीटीबी पर प्रसारित किया गया।

    प्रश्न:- आप अपने Professional Carrier के बारे कुछ बताइयें?
    उत्तर:- मैं लगभग 13 चैनलो से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रुप से जुड़ा रहा। सबसे पहले मैं दूरदर्शन से जुड़ा फिर जीटीबी, टीबी टुड़े, स्टार न्यूज, एनडीटीवी और अब नेटवर्क 18 से जुड़ा हूँ। इस तरह मैं भारत के हर बड़े चैनल और प्रोड़ेक्शन हाउस से किसी न किसी रुप में जुड़ा रहा।

    प्रश्न- क्या IPC और CRPC में बदलाव की जरुरत है?
    उत्तर- मेरा यह मानना है कि जब भी कोई नियम कानून बनायें जाते है तो वे उस समय की समाज व्यवस्था और उसकी आवश्यकता को ध्यान में रखकर बनाये जाते है, और एक लम्बे समय के बाद या तो उनकी आवश्यकता रह नही जाती या फिर बदलाव की जरुरत होती है, तो उनको रिव्यू करना जरुरी है, और एक ऐसा सिस्टम जरुर होना चाहियें जो एक निश्चित इंटरवल के बाद एक कमेटी उस सिस्टम को रिव्यू करे और रिव्यू करने के बाद सजेशन दें और जहां बदलाव की जरुर हो बदलाव सुनिश्चित करें।

    प्रश्न- समाज में दिन प्रतिदिन बढ. रहे क्राइम के बारे में आप क्या कहेगें?
    उत्तर- मैं ये समझता हूँ कि कोई भी व्यक्ति क्राइम के रास्ते पर तभी जाता है जब कोई और रास्ता न बचा हो। और उसके पीछे क्या सामाजिक स्थिति है उसका विश्लेषण जरुरी है और मेरा ये मानना है कि इसमें बहुत हद तक बेरोजगारी एक बड़ा कारण है क्योंकि जिसके पास काम होगा वे क्राइम क्यों करेगा, परन्तु मेरा मतलब ऐसा नही है जिनके पास काम है वो क्राइम नही करते, लोग वर्क पैलेस पर भी क्राइम करते है, इसके कई दूसरे कारण हो सके है जैसे एक तो बेरोजगारी और दूसरा घर परिवार में मिलने वाले संस्कार है। आज जोइंट फैमिली तो है नही जो बच्चें को दादा-दादी या नाना-नानी से कुछ सीखने को मिलता। इसलिए बच्चो को अच्छे संस्कार और सही मार्गदर्शन की जरुरत है जिससे उन्हे सही-गलत की पहचान हो सके।